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July 5, 2021

संतान को दोष न दें.

🙏 संतान को दोष न दें.
बालक को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाया और अंग्रेजी बोलना सिखाया,

'बर्थ डे' और 
'मैरेज एनिवर्सरी'

जैसे जीवन के शुभ प्रसंगों को अंग्रेजी संस्कृति के अनुसार

माता पिता को 'मम्मा' और
'डैड' कहना सिखाया. इत्यादि, इत्यादि...

जब अंग्रेजी संस्कृति से परिपूर्ण बालक बड़ा हो कर आपको समय नहीं देता, आपकी भावनाओं को नहीं समझता, आप को तुच्छ मान कर जुबान लडाता है और तब आपको बच्चों में कोई संस्कार नजर नहीं आता है, क्यों
तब घर के वातावरण को गमगीन किए बिना या संतान को दोष दिए बिना कहीं एकान्त में जाकर आप रो लें...

क्योंकि,

पुत्र की पहली वर्षगांठ से ही
भारतीय संस्कारों के बजाय आपने

केक कैसे काटा जाता है सिखाने वाले आप ही हैं..।

हवन कुंड में आहुति कैसे डाली जाए,... 
मंदिर,मंत्र, पूजा पाठ, आदर सत्कार, के संस्कार देने के बदले,

केवल फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने को ही अपनी शान समझने वाले आप ही है..।

बच्चा जब पहली बार घर से बाहर निकला तो उसे,
'प्रणाम - आशिर्वाद'

के बदले
'बाय बाय' 
कहना सिखाने वाले आप..।

परीक्षा देने जाते समय
इष्ट देव /बड़ों के 
पैर छू कर आशीर्वाद लेने के बदले

'Best of Luck'

कह कर परीक्षा भवन तक छोड़ने वाले आप..।

बालक के सफल होने पर मंदिर या गुरुद्वारे में प्रभु का शुक्रिया करने और घर में परिवार के साथ बैठ कर खुशियां मनाने के बदले,

होटल में पार्टी मनाने
की प्रथा को बढ़ावा देने वाले आप..।

बालक के विवाह के बाद

कुल देवता / देव दर्शन 
को भेजने की जगह पहले...

हनीमून के लिए 'फारेन /टूरिस्ट स्पॉट' भेजने की तैयारी करने वाले आप..।

ऐसे ही ढेर सारी अंग्रेजी संस्कृतियों को हमने जाने- अनजाने स्वीकार कर लिया है।

अब तो बड़े बुजुर्गों और श्रेष्ठों के पैर छूने में भी बच्चों को शर्म आती है..।

गलती किसकी...?? 
मात्र आप (मां-बाप) की

अंग्रेजी मात्र एक भाषा है, 
इसे सिर्फ सीखना है। 
अंग्रेजों की संस्कृति को
जीवन में उतारना नहीं है

हमारे इतिहास पर रिसर्च करके ही अल्बर्ट आईंसटाईन ने अणु परमाणु पर खोज की है…

आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके नासा अंतरिक्ष में ग्रहों की खोज कर रहा है।

आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके रशिया और अमेरीका बडे बडे हथियार बना रहा है।

आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके रूस, ब्रिटेन, अमेरीका, थाईलैंड, इंडोनेशिया बडे बडे देश बचपन से ही बच्चों को संस्कृत सिखा रहे हैं स्कूलों में।

आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके वहाँ के डाक्टर्स बिना इंजेक्शन, बिना अंग्रेजी दवाईयों के केवल ओमकार का जप करने से लोगों के हार्ट अटैक, बीपी, पेट, सिर, गले छाती की बडी बडी बिमारियाँ ठीक कर रहे हैं। ओमकार थैरपी का नाम देकर इस नाम से बडे बडे हॉस्पिटल खोल रहे हैं।

और हम किस दुनिया में जी रहे हैं?? अपने इतिहास पर गौरव करने की बजाय हम अपने इतिहास को भूलते जा रहे हैं। हम अपनी महिमा को भूलते जा रहे हैं। हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं।

🙏मानो तो ठीक, 
नहीं तो भगवान ने जिंदगी दी है..

चल रही है,
चलती रहेगी..। 
राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान से🙏
बुरा लगे तो कहा सुना माफ 🙏

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